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खाद्य पदार्थों में मिलावट के बड़े ठिकानों: तक क्यों नहीं पहुंचती प्रशासन की कार्रवाई?

स्थानीय · नीमच · · अपडेट: · नई विधा डेस्क

खाद्य पदार्थों में मिलावट के बड़े ठिकानों: तक क्यों नहीं पहुंचती प्रशासन की कार्रवाई?

तेल, मसाले और बेसन बनाने वाली स्थानीय इकाइयों की सैंपलिंग पर उठे सवाल; छोटे दुकानदारों पर कार्रवाई के साथ बड़े निर्माताओं और पैकेजिंग यूनिट्स की जांच की भी मांग शहर में चर्चा है कि खाद्य पदार्थों की बिक्री करने वाले छोटे प्रतिष्ठानों पर तो कार्रवाई दिखाई देती है, लेकिन जिन इकाइयों में खाद्य सामग्री का निर्माण और पैकेजिंग होती है, वहां नियमित और प्रभावी जांच कितनी हो रही है, यह स्पष्ट नहीं है। ऐसे में प्रशासन की कार्रवाई की निष्पक्षता और दायरे को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

तेल, मसाले और बेसन के बड़े कारोबारियों की जांच कब?

नीमच के औद्योगिक क्षेत्र और आसपास के इलाकों में खाद्य तेल, विभिन्न प्रकार के मसालों और बेसन का निर्माण एवं पैकेजिंग करने वाली इकाइयां संचालित हैं। खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुसार इन इकाइयों में तैयार होने वाले उत्पादों की गुणवत्ता की जांच और नियमानुसार सैंपलिंग भी जरूरी है।

सवाल यह है कि इन स्थानीय निर्माताओं और पैकेजिंग यूनिट्स से कितने नियमित अंतराल पर नमूने लिए जाते हैं? उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया की जांच किस स्तर पर होती है? प्रशासन को इन सवालों पर स्पष्ट जानकारी सामने लानी चाहिए।

छोटे दुकानदारों पर कार्रवाई, बड़े ठिकानों पर चुप्पी क्यों?

त्योहारी सीजन में मिठाई और नमकीन की दुकानों पर छापेमारी कर नमूने लेना और अनियमितता मिलने पर कार्रवाई करना खाद्य सुरक्षा की दृष्टि से जरूरी है। लेकिन केवल खुदरा दुकानों तक सीमित जांच से मिलावट की पूरी समस्या पर नियंत्रण नहीं पाया जा सकता।

खाद्य सामग्री के निर्माण, प्रसंस्करण और पैकेजिंग से जुड़ी इकाइयों की जांच भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। यदि किसी उत्पाद की गुणवत्ता में गड़बड़ी निर्माण के स्तर पर होती है, तो वह सामग्री बाजार के माध्यम से बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं तक पहुंच सकती है।

कार्रवाई से पहले सूचना पहुंचने और रसूख के इस्तेमाल के आरोप

लेख में यह आरोप भी उठाया गया है कि कुछ बड़े प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की योजना बनने से पहले ही संबंधित लोगों तक सूचना पहुंचने की आशंका रहती है। वहीं, कार्रवाई के दौरान राजनीतिक या प्रभावशाली हस्तक्षेप होने की बातें भी कही जा रही हैं।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। खाद्य सुरक्षा विभाग को ऐसी शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि किसी भी प्रतिष्ठान को उसके प्रभाव या रसूख के आधार पर अनुचित राहत मिलने की आशंका न रहे।

प्रशासन से उठे प्रमुख सवाल

औद्योगिक क्षेत्रों में खाद्य तेल, मसाले और बेसन बनाने वाली इकाइयों की नियमित सैंपलिंग कब होती है?

स्थानीय निर्माताओं और पैकेजिंग यूनिट्स के उत्पादों की गुणवत्ता की जांच कितनी बार की जाती है?

खाद्य सामग्री के निर्माण से लेकर बाजार में बिक्री तक गुणवत्ता की निगरानी कैसे सुनिश्चित की जा रही है?

बड़े कारोबारियों और निर्माताओं के खिलाफ मिली शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई है?

जांच और छापेमारी की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए विभाग क्या कदम उठा रहा है?

आमजन की सेहत से जुड़ा है मामला

खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता का सीधा संबंध आमजन के स्वास्थ्य से है। इसलिए खाद्य सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी केवल दुकानों पर नमूने लेने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। निर्माण इकाइयों, पैकेजिंग केंद्रों और वितरण व्यवस्था की भी नियमानुसार जांच जरूरी है।

अब देखना होगा कि खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन इन सवालों को कितनी गंभीरता से लेता है और बड़े निर्माताओं तथा पैकेजिंग इकाइयों की जांच को लेकर क्या कदम उठाता है। मिलावट के खिलाफ कार्रवाई निष्पक्ष, पारदर्शी और सभी स्तरों पर समान रूप से होना जरूरी है।

लेखक: दीपक चौहान

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