अफीम नीति के विरोध में किसानों का नारकोटिक्स कार्यालय पर घेराव: छह प्रमुख मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन

किसानों ने वर्तमान अफीम नीति के प्रावधानों पर असंतोष जताते हुए कहा कि खेती की बढ़ती लागत और कड़े नियमों के कारण अफीम उत्पादकों को परेशानी हो रही है। उन्होंने सरकार से नीति में संशोधन कर लंबित समस्याओं का समाधान करने की मांग की।
ज्ञापन में उठाईं छह प्रमुख मांगें
1. मॉर्फिन मानक 3.7 प्रतिशत किया जाए: किसानों ने वर्तमान मॉर्फिन मानक में संशोधन कर इसे 3.7 प्रतिशत निर्धारित करने की मांग की। उनका कहना है कि मौजूदा प्रावधानों के कारण कई किसानों के पुराने चीरा लगाने वाले पट्टे प्रभावित हुए हैं।
2. सीपीएस किसानों को 10 आरी का पट्टा मिले: किसानों ने 90 किलोग्राम या उससे अधिक औसत डोडा उत्पादन देने वाले किसानों को 5 आरी के स्थान पर 10 आरी का चीरा लगाने वाला पट्टा देने की मांग की।
3. पुराने और नए अफीम पट्टे जारी हों: वर्ष 1997-98 से अब तक के पात्र किसानों के लंबित मामलों पर पुनर्विचार कर पट्टे बहाल करने और नए पात्र किसानों को लाइसेंस जारी करने की मांग की गई।
4. अफीम का सरकारी भाव एक लाख रुपये प्रति किलो हो: किसानों ने खाद, दवाइयों, बिजली, कृषि उपकरणों और मजदूरी की बढ़ती लागत का हवाला देते हुए अफीम का सरकारी खरीद मूल्य बढ़ाकर एक लाख रुपये प्रति किलोग्राम करने की मांग रखी।
5. एनडीपीएस एक्ट और डोडाचूरा के प्रावधानों में बदलाव हो: ज्ञापन में डोडाचूरा से जुड़े मामलों में एनडीपीएस एक्ट की संबंधित धाराओं पर पुनर्विचार करने की मांग की गई।
6. प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों के पट्टे बहाल हों: ओलावृष्टि और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से फसल खराब होने के मामलों में प्रभावित किसानों के पट्टों पर पुनर्विचार कर पुराने चीरा लगाने वाले पट्टे बहाल करने की मांग की गई।
मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी
किसान नेताओं ने कहा कि अफीम उत्पादकों की समस्याओं का स्थायी समाधान किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने उनकी मांगों पर सकारात्मक और समयबद्ध निर्णय नहीं लिया, तो किसान आंदोलन को और तेज करेंगे।
प्रदर्शन में नीमच, मंदसौर, प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़ सहित आसपास के क्षेत्रों के बड़ी संख्या में अफीम उत्पादक किसान शामिल हुए।