नीमच में पाताल की ओर जा रहा भूजल, गर्मी में जल संकट के आसार: कम बारिश से घट सकता है सिंचित रकबा

कम बारिश से सिंचाई और पेयजल पर चिंता
समाचार रिपोर्ट के अनुसार, जिले में वर्ष 2026 में अब तक लगभग 600 से 650 मिलीमीटर बारिश दर्ज होने के आंकड़े सामने आए हैं, जबकि जिले की सामान्य औसत वर्षा करीब 825 मिलीमीटर बताई गई है।
कम बारिश के चलते जल स्रोतों में पर्याप्त पानी जमा नहीं हो पाया है। इससे रबी सीजन में सिंचित रकबे में कमी आने की आशंका जताई जा रही है। इसका असर कृषि उत्पादन और किसानों की आय पर भी पड़ सकता है।
पिछले वर्ष की तुलना में सिंचित रकबे में कमी की आशंका
रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में जिले में करीब 895 से 900 मिलीमीटर बारिश हुई थी। उस दौरान रबी सीजन में लगभग 1.45 लाख हेक्टेयर तक सिंचित रकबा पहुंचने का उल्लेख है। वहीं, कम बारिश की स्थिति में इस वर्ष सिंचित रकबा घटकर लगभग 1.10 से 1.15 लाख हेक्टेयर तक रह जाने की आशंका जताई गई है।
कम पानी उपलब्ध होने से किसानों को फसल चयन और सिंचाई प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना पड़ सकता है।
नालों पर बोरी बंधान बनाकर पानी रोकने की कोशिश
जल संकट की आशंका को देखते हुए प्रशासन, पंचायतों और ग्रामीण विकास विभाग की ओर से जल संरक्षण के प्रयास किए जा रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, मनासा, जावद और नीमच क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में नालों पर बोरी बंधान बनाकर बहते पानी को रोकने की कोशिश की जा रही है।
इससे वर्षा जल को कुछ समय तक रोकने और आसपास के कुओं तथा नलकूपों में भूजल पुनर्भरण बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
कृषि विशेषज्ञों ने दी कम पानी वाली फसलों की सलाह
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को उपलब्ध पानी के अनुसार फसलों का चयन करने की सलाह दी है। कम पानी में तैयार होने वाली फसलों और सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों पर ध्यान देना उपयोगी हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पानी का विवेकपूर्ण उपयोग, सिंचाई की योजना और जल संरक्षण के उपाय आने वाले महीनों में महत्वपूर्ण होंगे।
समय रहते जल संरक्षण जरूरी
कम बारिश और भूजल स्तर में गिरावट को देखते हुए जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और उपलब्ध जल स्रोतों के बेहतर प्रबंधन की आवश्यकता बढ़ गई है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आगामी गर्मी में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पेयजल की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।