अफीम नीति में देरी से किसान परेशान, नारकोटिक्स विभाग की चुप्पी से अफवाहों का बाजार गर्म

बुवाई का समय नजदीक, किसान असमंजस में
अफीम की बुवाई का समय सीमित होता है। खेतों की तैयारी, खाद-बीज की व्यवस्था और मौसम को ध्यान में रखकर किसानों को समय पर निर्णय लेना पड़ता है। नीति में देरी से आगामी फसल की तैयारी और किसानों की आर्थिक योजना प्रभावित होने की आशंका है।
आधिकारिक जानकारी के अभाव में अफवाहें तेज
किसानों का कहना है कि नीति को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने से सोशल मीडिया पर तरह-तरह की चर्चाएं और अफवाहें फैल रही हैं। इससे किसान सही जानकारी के लिए सरकारी कार्यालयों और जनप्रतिनिधियों से संपर्क कर रहे हैं।
किसानों की मांग है कि केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो जल्द आधिकारिक बयान जारी करे, ताकि नीति से जुड़ी स्थिति स्पष्ट हो और भ्रम की स्थिति दूर हो सके।
कांग्रेस ने प्रदर्शन कर सौंपे ज्ञापन
अफीम नीति में देरी को लेकर कांग्रेस नेताओं और किसान संगठनों ने कलेक्ट्रेट तथा CBN कार्यालयों पर प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपे हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि किसानों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।
नेताओं के आश्वासन, लेकिन नीति का इंतजार
भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बंशीलाल गुर्जर, मंदसौर-नीमच सांसद सुधीर गुप्ता और चित्तौड़गढ़ सांसद सीपी जोशी की ओर से किसानों के हित में नीति में बदलाव और पट्टों में बढ़ोतरी को लेकर बयान सामने आए हैं। हालांकि, किसानों को अब भी आधिकारिक नीति और आदेश का इंतजार है।
किसानों का कहना है कि जब तक संबंधित विभाग की ओर से औपचारिक आदेश जारी नहीं होता, तब तक आश्वासनों के आधार पर खेती से जुड़े फैसले लेना मुश्किल है।
CBN की आधिकारिक घोषणा पर टिकी नजरें
बुवाई का समय नजदीक होने के कारण किसान जल्द नीति जारी होने की उम्मीद कर रहे हैं। अब यह देखना होगा कि केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो कब तक आधिकारिक घोषणा करता है और किसानों की चिंताओं का समाधान कैसे होता है।