अफीम नीति 2026-27 में संशोधन की मांग को लेकर नारकोटिक्स कार्यालय का घेराव: वित्त मंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

किसानों का कहना है कि अफीम की खेती में बढ़ती लागत, मेहनत और वर्तमान नीति के कड़े प्रावधानों के कारण उत्पादकों में असंतोष है। किसान नेता राजकुमार अहिर, पिपलिया मंडी के श्यामलाल जॉकचंद सहित अन्य किसान प्रतिनिधियों ने आंदोलन का नेतृत्व किया।
ज्ञापन में रखीं छह प्रमुख मांगें
1. मॉर्फिन की निर्धारित सीमा 3.7 प्रतिशत की जाए
किसानों ने मांग की कि मॉर्फिन की निर्धारित मात्रा 3.7 प्रतिशत की जाए। उनका कहना है कि वर्तमान नीति में 4.2 और 4.4 प्रतिशत की शर्तों के कारण कई किसानों के पुराने चीरा लगाने वाले पट्टे निरस्त कर उन्हें केवल 5 आरी के सीपीएस (CPS) पट्टों में बदल दिया गया है।
2. सीपीएस किसानों को मिले उचित राहत
किसानों ने मांग की कि 90 किलोग्राम से अधिक औसत डोडा उत्पादन देने वाले किसानों को भी केवल 5 आरी का पट्टा देने के बजाय 10 आरी का चीरा लगाने वाला पट्टा दिया जाए। सीपीएस पद्धति में सुधार कर पट्टों का दायरा बढ़ाने की मांग भी उठाई गई।
3. लंबित और नए अफीम पट्टे बहाल किए जाएं
ज्ञापन में वर्ष 1997-98 से अब तक के सभी पात्र किसानों के मामलों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर अफीम पट्टे पुनः बहाल करने की मांग की गई। साथ ही नए पात्र किसानों को खेती से जोड़ने के लिए नए लाइसेंस जारी करने की बात कही गई।
4. अफीम का सरकारी खरीद मूल्य एक लाख रुपये प्रति किलोग्राम किया जाए
किसानों ने बढ़ती महंगाई, खाद, दवाइयों, कृषि उपकरणों, बिजली और मजदूरी की लागत का हवाला देते हुए अफीम का सरकारी खरीद मूल्य बढ़ाकर एक लाख रुपये प्रति किलोग्राम करने की मांग रखी।
5. एनडीपीएस एक्ट और डोडाचूरा संबंधी प्रावधानों पर पुनर्विचार हो
किसानों ने डोडाचूरा में मॉर्फिन की मात्रा 0.02 प्रतिशत से कम होने का दावा करते हुए एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/15 और 8/29 के प्रावधानों पर पुनर्विचार की मांग की। उनका कहना है कि इससे डोडाचूरा से जुड़े मामलों में जेलों में बंद किसानों को राहत मिल सकती है।
6. प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों के पट्टे बहाल हों
किसानों ने बताया कि ओलावृष्टि और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से खराब हुई फसलों को विभाग की मौजूदगी में नष्ट कराने के बावजूद कुछ किसानों के पट्टे सीपीएस में बदल दिए गए। ऐसे मामलों पर पुनर्विचार कर पुराने चीरा लगाने वाले पट्टे बहाल करने की मांग की गई।
मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी
किसान नेताओं ने कहा कि अफीम उत्पादकों की समस्याओं का स्थायी समाधान किया जाना चाहिए। यदि केंद्र सरकार ने मांगों पर सकारात्मक और समयबद्ध निर्णय नहीं लिया, तो किसानों को आंदोलन तेज करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
ज्ञापन सौंपने के दौरान नीमच, मंदसौर, प्रतापगढ़ और चित्तौड़गढ़ क्षेत्र के बड़ी संख्या में अफीम उत्पादक किसान उपस्थित रहे।