कम बारिश के बीच धड़ल्ले से हो रहा ट्यूबवेल खनन, गहराने लगा जल संकट: लहसुन की फसल की सिंचाई पर मंडराया संकट

50 करोड़ की लहसुन फसल की सिंचाई की चिंता
क्षेत्र के किसानों ने इस वर्ष लगभग 50 करोड़ रुपये की उन्नत किस्म की लहसुन की फसल की बुवाई की है। लहसुन की फसल को पर्याप्त सिंचाई की आवश्यकता होती है। ऐसे में भूजल का लगातार दोहन किसानों के लिए बड़ी चिंता बनता जा रहा है। समय पर पानी नहीं मिला तो फसल की पैदावार प्रभावित होने की आशंका है।
कई गांवों में जारी है ट्यूबवेल खनन
जावद, बावल, केलुखेड़ा, तारापुर, उम्मेदपुर, अठाना, हम्मुखेड़िया, डूंगा, आटा, सरोदा, डांगी और चंडोल सहित आसपास के कई गांवों में ट्यूबवेल खनन जारी है। कुछ क्षेत्रों में नाले और जल स्रोतों से भी सिंचाई के लिए पानी निकाला जा रहा है।
प्रशासन के प्रतिबंधात्मक आदेशों पर सवाल
जल संकट की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा ट्यूबवेल खनन पर प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, किसानों का कहना है कि इसके बावजूद क्षेत्र में खनन गतिविधियां जारी हैं और प्रतिबंधों का प्रभावी पालन होता दिखाई नहीं दे रहा।
किसानों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उठाई मांग
सामाजिक कार्यकर्ता कपिल देव शर्मा ने जिला प्रशासन से ट्यूबवेल खनन पर सख्ती से रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने जल स्रोतों के संरक्षण, भूजल के अनावश्यक दोहन पर नियंत्रण और कम पानी वाली फसलों एवं आधुनिक सिंचाई पद्धतियों के प्रति किसानों को जागरूक करने की आवश्यकता बताई।
भविष्य में और गंभीर हो सकता है जल संकट
क्षेत्र में लगातार भूजल दोहन और कम बारिश के कारण आने वाले समय में पेयजल एवं सिंचाई का संकट और गहरा सकता है। ऐसे में जल संरक्षण, ट्यूबवेल खनन पर प्रभावी निगरानी और उपलब्ध जल संसाधनों के उचित उपयोग की जरूरत है।