नीमच में सामाजिक जमीनों पर व्यावसायिक मेलों के आयोजन पर सवाल, स्थानीय व्यापारियों ने जताई चिंता

स्टॉल किराये और जमीन के उपयोग पर सवाल
रिपोर्ट के अनुसार, कुछ आयोजनों में व्यापारियों से पांच से दस दिनों के लिए लगभग ₹5,000 से ₹20,000 तक किराया लिए जाने का दावा किया गया है। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि वे नियमित दुकान का किराया, बिजली बिल और टैक्स चुकाते हैं, जबकि मेलों में कम अवधि के लिए स्टॉल लगाने वाले बाहरी व्यापारी कम कीमत पर सामान बेचते हैं। इससे स्थानीय कारोबारियों के सामने प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है।
लीज की शर्तों और अनुमति की जांच की मांग
मामले में मुख्य सवाल यह है कि संबंधित स्थलों की मूल लीज में किस प्रकार के उपयोग की अनुमति दी गई है और क्या वहां व्यावसायिक आयोजन के लिए आवश्यक स्वीकृतियां ली गई हैं।
यदि किसी जमीन का आवंटन निर्धारित सामाजिक या सामुदायिक उद्देश्य के लिए हुआ है, तो उसके अन्य उपयोग की वैधता संबंधित लीज की शर्तों, अनुमतियों और लागू नियमों के आधार पर तय होगी।
SDM और CMO के अलग-अलग बयान
इस मामले पर SDM नीमच पराग जैन ने कहा कि दुकान लगाना अपने आप में अवैध नहीं है और नगर पालिका की जमीन से जुड़े मामलों में नगर पालिका की जिम्मेदारी है।
वहीं, नगर पालिका CMO दुर्गा बामनिया ने कहा कि यदि मामला नगर पालिका के स्वामित्व वाली जमीन का है, तो संबंधित दस्तावेजों और लीज की शर्तों की जांच की जाएगी। उन्होंने नियमानुसार नोटिस जारी करने और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।
जांच और कार्रवाई पर टिकी नजरें
अब यह देखना होगा कि संबंधित जमीनों के पट्टों, आयोजनों की अनुमति और किराये पर स्टॉल देने की प्रक्रिया की जांच में क्या सामने आता है। स्थानीय व्यापारियों को उम्मीद है कि प्रशासन नियमों के अनुरूप कार्रवाई करेगा और शहर में व्यावसायिक गतिविधियों के लिए स्पष्ट व्यवस्था सुनिश्चित करेगा।