नीमच में रिश्वतखोरी के मामलों से प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल, लोकायुक्त की कार्रवाइयों ने खोली पोल

वेतन भुगतान और विभागीय कार्यवाही के नाम पर रिश्वत का मामला
रिपोर्ट के अनुसार, जून 2026 में आदिम जाति कल्याण विभाग से जुड़े एक मामले में लोकायुक्त पुलिस ने जिला संयोजक राकेश राठौर और छात्रावास अधीक्षक हरीश चौहान को कथित रिश्वतखोरी के मामले में पकड़ा था। शिकायत के मुताबिक, विभागीय जांच में सहयोग और लंबित वेतन भुगतान के बदले रिश्वत मांगी गई थी। मामले में ₹1.25 लाख की राशि का उल्लेख किया गया है।
जमीन बंटवारे के मामले में दो आरोपियों को सजा
रिपोर्ट में नवंबर 2024 के एक मामले का भी उल्लेख है, जिसमें राजस्व विभाग से जुड़े पटवारी सुभाष सिंह और चौकीदार नूर खान पर जमीन बंटवारे के लिए ₹18 हजार की रिश्वत मांगने का आरोप था। खबर के अनुसार, न्यायालय ने सुनवाई के बाद दोनों को तीन-तीन साल के कारावास और ₹10-10 हजार के अर्थदंड की सजा सुनाई।
अन्य विभागों में भी शिकायतें
पंचायत, जनपद, स्वास्थ्य और शिक्षा विभागों से जुड़े कुछ मामलों में जाति प्रमाण पत्र, पेंशन, प्रधानमंत्री आवास योजना और निर्माण कार्यों के मूल्यांकन के नाम पर कथित अवैध वसूली की शिकायतें सामने आने का उल्लेख किया गया है। इन शिकायतों की वास्तविक स्थिति और प्रत्येक मामले के परिणाम की अलग-अलग पुष्टि आवश्यक है।
पारदर्शिता और निगरानी मजबूत करने की जरूरत
सरकारी योजनाओं का लाभ लेने, लंबित वेतन प्राप्त करने और जमीन संबंधी दस्तावेज बनवाने के लिए नागरिकों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े, इसके लिए शिकायत निवारण व्यवस्था को प्रभावी बनाना जरूरी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित निगरानी, शिकायतों की समयबद्ध जांच और दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई से सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ाई जा सकती है।