चरणजीत सिंह सप्रा ने चुनाव आयोग को घेरा, 1 नवंबर को दिल्ली में महारैली: अफीम नीति को किसान विरोधी बताया

मतदाता सूची और चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल
कांग्रेस ने मतदाता सूची में नाम हटाए जाने और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता से जुड़े मुद्दे उठाए। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची की जांच और सुधार की प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए, ताकि किसी पात्र मतदाता का नाम सूची से न छूटे।
कांग्रेस की ओर से मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर जन-जागरूकता अभियान चलाने की बात भी कही गई है। इसके तहत गांवों में चौपाल लगाकर मतदाताओं को जानकारी देने और सूची की जांच में सहयोग करने की योजना है।
1 नवंबर को दिल्ली में महारैली
समाचार के अनुसार, कांग्रेस ने 1 नवंबर को दिल्ली में महारैली आयोजित करने की घोषणा की है। पार्टी का उद्देश्य मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना है।
कांग्रेस ने चुनाव आयोग से मतदाता सूची की जांच और शिकायतों के निपटारे में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है।
अफीम नीति 2026-27 पर पुनर्विचार की मांग
कांग्रेस ने अफीम नीति 2026-27 को लेकर भी किसानों की समस्याओं का मुद्दा उठाया। पार्टी का कहना है कि नई नीति में किसानों की उपज, मार्फिन स्तर, लाइसेंस क्षेत्र और खरीद मूल्य से जुड़े प्रावधानों पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
कांग्रेस नेताओं ने किसानों को राहत देने, पात्रता के मानकों की समीक्षा करने और अफीम उत्पादकों की शिकायतों पर ध्यान देने की मांग की। पार्टी ने नीति के प्रावधानों को लेकर किसानों के बीच मौजूद असंतोष को भी उठाया।
गांव-गांव चौपाल लगाकर अभियान चलाने की तैयारी
कांग्रेस ने 25 नवंबर तक गांव-गांव चौपाल आयोजित कर मतदाता सूची की जांच कराने की बात कही है। अभियान के माध्यम से मतदाताओं को अपने नाम और विवरण की जांच करने के लिए जागरूक किया जाएगा।
पार्टी ने मतदाता अधिकारों और किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन जारी रखने के संकेत दिए हैं। अब इन मांगों पर चुनाव आयोग और संबंधित सरकारी विभागों की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।