नीमच में स्कूली बच्चों की सुरक्षा पर सवाल, स्कूल वाहनों की जांच की मांग: मजिस्ट्रियल जांच पर टिकी निगाहें

पुराने और जर्जर वाहनों को लेकर चिंता
खबर के अनुसार, जिले में कुछ स्कूल वाहनों की स्थिति और उनके रखरखाव को लेकर सवाल उठाए गए हैं। अभिभावकों की चिंता है कि यदि वाहनों की नियमित जांच नहीं हुई, तो बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है।
स्कूलों और वाहनों की जानकारी का सत्यापन जरूरी
समाचार में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, जिले में कुल 1,361 स्कूलों का उल्लेख किया गया है। वहीं, यू-डाइस+ 2025-26 के आंकड़ों के आधार पर 681 स्कूलों की जानकारी सामने आने की बात कही गई है। इन आंकड़ों और स्कूलों में संचालित वाहनों की वास्तविक संख्या का सत्यापन जरूरी है।
किन सुरक्षा मानकों की जांच होनी चाहिए?
स्कूल वाहनों की जांच के दौरान फिटनेस प्रमाणपत्र, परमिट, बीमा, प्रदूषण प्रमाणपत्र, चालक का लाइसेंस और अन्य जरूरी दस्तावेजों की पड़ताल की जानी चाहिए। इसके साथ ही फर्स्ट एड बॉक्स, अग्निशमन उपकरण, आपातकालीन निकास और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े अन्य प्रबंधों की स्थिति भी देखना जरूरी है।
मजिस्ट्रियल जांच से स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद
मजिस्ट्रियल जांच के माध्यम से स्कूल वाहनों की वास्तविक स्थिति, सुरक्षा मानकों के पालन और जिम्मेदार पक्षों की भूमिका की पड़ताल की जा सकती है। अभिभावकों और विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण और नियमों का पालन महत्वपूर्ण है।